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Sunday, December 5, 2010

Suraj ka Sapna

सुबह से आँख में बसता
वो सपना सूरज का .
उसी के ताप से जलता,
पिघलती मोम सी
सब पास की बेबस धराएं.
महल की काली दीवारें जलाता
आग से अपने
वो सपना सूरज का.

और एक रौशनी का है वो दरिया,
बहाता  बाढ़ में
छोटी -बड़ी
सारी निराशा,
नयी धरती बिछाता.
नए खेतों में उपजेंगे
नए दिन के नए सपने.
सुबह से आँख में बसता
वो सपना सूरज का.

Wednesday, February 10, 2010

Pashu Prem

पशु प्रेम 


सावन के जल में
सोंधे भूतल में
हरियाली के बीच
गाड़ी को खींच
किसान खीज रहा है |
बैलों को पीट रहा है |
और तभी मेनका आती है -
किसान को खींच
वाणी से पीट
ले जाती है
और पशु अत्याचार के जुर्म में
हथकड़ी लगाती है |


पत्नी की कोरोना

साधारण खांसी बुखार  जबसे कोरोना निकल गया, मेरी पत्नी जी का तो  जैसे मौसम बदल गया | दवाई का डिब्बा, औ‌‍क्सीमीटर , थर्मोमीटर सर्वदा साथ हैं बी...