Thursday, April 15, 2010

khuda-e- husn

ऐ खुदा-ए-हुस्न
तेरा आना क़यामत था |
गिरा कर बिजलियाँ सब पर
तेरा जाना क़यामत था ||

कि जुड़वाँ शोले थे सुलगे
शहर में आग फैली थी |
कि दरिया सूख ही जाता
कि ऐसी आग गहरी थी ||

ऐसी आग सुलगा कर
यूँ शर्माना क़यामत था |
और पल में चाँद से शोला
बदल जाना क़यामत था ||

कि दिन में रात को लाती
कमर तक तेरी जुल्फें थीं
अँधेरी रात से काली
नदी सी बहती जैसे थीं |

कि ऐसी जुल्फें लहरा कर
मचल आना क़यामत था |
और जादू कर कोई काला
भुला जाना क़यामत था ||

ऐ खुदा-ए- हुस्न ......

chaand

वो कहते हैं चले आओ
महीनों बीत जाने हैं
कि छत पर चाँद का आना
कभी देखा नहीं हमने |

कि परसों ईद आनी है
नहीं आने पर
किस मुँह से
हम छत पर चाँद देखेंगे |

Wednesday, February 10, 2010

Madhushala (inspired by bachchan ji)

श्री हरिवंश राय बच्चन जी की मधुशाला से प्रेरणा ले कर मैंने ये पंक्तियाँ तब लिखीं थी जब मैं 10th  कक्षा में था | आज तक उनके जैसे रस वाली कवितायेँ कम ही मिल पायी  हैं |

#1
ह्रदय थाम कर खड़े थे सारे, क्या नृप, क्या सैनिक, क्या ग्वाला ;
द्वार खोल कर निकल रही थी मुस्काती कंचनबाला |
देव स्वर्ग से देख रहे थे निर्विकार उस सुन्दर को
ऋषि मुनि ताप छोड़ चुके, अब बना तपोवन मधुशाला ||

#२
आज नहीं छूना है मुझको,
मदिरालय में मद का प्याला |
हे रम्भा! मुझको अब दे दे ,
अपने तू नयनों का हाला ||
डूब मरुँ उस मद के घर में
तू मेरा उद्धार करे |
लगे सुहानी आज मृत्यु भी
मोक्ष दिला दे मधुशाला

Pashu Prem

पशु प्रेम 


सावन के जल में
सोंधे भूतल में
हरियाली के बीच
गाड़ी को खींच
किसान खीज रहा है |
बैलों को पीट रहा है |
और तभी मेनका आती है -
किसान को खींच
वाणी से पीट
ले जाती है
और पशु अत्याचार के जुर्म में
हथकड़ी लगाती है |


Kranti Gaan

काल यदि आया है अब तो
करें क्रांति का जय नारा |
पुष्पक सेज भुला कर अब दें 
कंटक राह पर जीवन सारा |

कल कोमल हो इसके हेतु 
आज अंत हो जाए तो क्या ?
युद्ध बिना ये जीवन क्या है ?
मोक्ष नहीं मिल पाए तो क्या ? 

सूर्य नहीं बनते हैं तब भी 
चलो बनें कोई धूमिल तारा |
काल यदि आया है अब तो 
करें क्रांति का जय नारा ||

कर कर में रहकर क्या होगा 
चलो कफ़न अब बांधें सर पर, 
पुरुष नहीं बैठा करते हैं 
कर में लेकर चूड़ी घर पर |

ले मशाल अब पथ पर बढ़ कर 
आज बाधा देना है पारा | 
काल यदि आया है अब तो 
करें क्रांति का जय नारा ||

पत्नी की कोरोना

साधारण खांसी बुखार  जबसे कोरोना निकल गया, मेरी पत्नी जी का तो  जैसे मौसम बदल गया | दवाई का डिब्बा, औ‌‍क्सीमीटर , थर्मोमीटर सर्वदा साथ हैं बी...